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कुछ ख्वाब अधूरे से

Posted On: 21 May, 2014 Others में

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कुछ ख्वाब अधूरे से है

जो जागने नहीं देते,

कुछ पूरे होते हैं तो कुछ रोने नहीं देते।


कुछ ख्वाब अधूरे से हैं कुछ अश्क बहाकर जाते हैं

तो कुछ सांस बहा ले जाते हैंकुछ ख्वाब अधूरे से है।


कुछ प्रेम डगर पर देखें हैं,

तो कुछ जीवन पथ पर सजाएं हैं,

कुछ हमेशा याद रहते हैं

तो कुछ भूलाए नहीं जाते हैं,

कुछ ख्वाब अधूरे से हैं।


ममता को मां को बनने की कामना है,

तो प्रेमी को प्रेम की लालसा है,

निर्धन को माया की तलाश है,

तो धनवान को आस की चाह है,


कुछ ख्वाब अधूरे से हैं,

अधूरे ख्वाबों की गठरी,

जिंदगी की पटरी

पर कब बन जाती है बोझ,

इंसान नहीं पाता है यह सोच।


(उपरोक्त कविता मेरे यानि मनोज के द्वारा लिखी गई है। “मेरी मौत” के बाद यह मेरे दूसरी कविता है।

लेखन के क्षेत्र में लगभग चार साल काम करते हुए यह दूसरा ही मौका है जब किसी कविता पर हाथ आजमाइश का मौका मिला है।

आशा है किसी को पसंद आएगी।)

Web Title : Kuch Khawab adhure se Hindi Poem



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3 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

    Manoj के द्वारा
    August 13, 2014

    योगी जी आपके प्रोत्साहन भरे कमेंट के लिए धन्यवाद

deepak pande के द्वारा
May 26, 2014

बहुत खूब आदरणीय मनोज जी


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