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आज के समय में प्यार, इश्क और ....

Posted On: 21 Sep, 2010 Others में

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प्यार पर ही यह दूनिया कायम हैं. यह राज हर किसी को मालूम है. कृष्ण हो या शिव सब प्यार में मोहित थे. प्यार का ही असर है कि दूनिया इतनी खूबसूरत है. दूनिया के सात अजूबों में से एक भी प्यार की ही निशानी है. लेकिन आज का समय प्यार को अजब परिभाषा दे चुका है आज प्यार का मतलब सेक्स हो चुका है. आज सेक्स और प्यार में अंतर बता पाना मुश्किल ही नहीं नामुमकिन हो गया है.

एक समय था जब प्यार को लोग पूजा मानते थे,कृष्ण और राधा को लोग पवित्र मानते थे लेकिन समय ने जैसे सब बदल दिया. आज प्यार सिर्फ वासना और शरीर की भूख पूरा करने का माध्यम रहा गया है.

पश्चिमी सभ्यता और फिल्मों के बिगडते स्वरूप ने युवा मन को भटकने पर आतुर कर दिया है. पहले छुप छुप होने वाला प्यार आज सबके सामने खूलमा खुला होता है. और आज सब वकालत कराते है कि इसमें गलत ही क्या है जब हम आजाद है तो क्यों कुछ छुपाए.

पर कभी सोचा है किसने कि अब नैतिकता कहां है, किस गाली में छुप गयी है यह बला. नही ना लेकिन यह सोचने वाली बात है क्योंकि हमारा कल इसी समाज में रहेगा क्या हम बर्दाश्त कर सकेंगे कि हमारे बच्चे इसी गंदी संस्कृति के शिकार हो जब तक आजादी की बात होती है तब तक सब सही है, लेकिन जब आजादी अराजकता बन जाती है तो यह समाज और संस्कृति दोनों के लिए एक खतरा होती है.

लेकिन यह समाज हम युवाओं से ही बनता है हमें खूद पर काबू रखना होगा और अपने छोटों को नैतिकता का मोल समझाना होगा ताकि आने वाले समय में हमें शर्मिंदा न होना पडें.

आए दिन होने वाले ऑनर किलिंग, बलात्कार, रेप, होमोसेक्सुअल के केसों ने हमें मजबुर कर दिया है कि हम अपनी नैतिकता और समाज में शिष्टता के बारें में सोचें.

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4 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

ajaydubeydeoria के द्वारा
March 19, 2012

आज हमारे समाज में जो विकृति पैदा हो गयी है यह सिर्फ पाश्चात्य का प्रभाव है. http://ajaydubeydeoria.jagranjunction.com

RAGHAVENDRA के द्वारा
September 22, 2010

i am agree with your comment and i want to include it also ,please everyone pray for their love not for physical relation, love is a god and in our culture god is true and hence our love should be true after thought this all by your heart you get love can not force you for any do any bad job .. please try to get your true love

Piyush Pant, Haldwani के द्वारा
September 21, 2010

अच्छे लेख और अच्छे विषय की सुन्दर प्रस्तुति के लिए हार्दिक बधाई……..

abodhbaalak के द्वारा
September 21, 2010

मनोज जी बात तो आपकी सोलह आना सत्य है पर इसके लिए दोषी कौन है? हम सब ही ना? आज के दौर में, टेलीविजन ने बल्कि ये कहें की केबल टीवी ने सब को बदल दिया है, आज हम वो सब कुछ साथ बैठ के देखते हैं जो के आजसे कुछ साल पहले देखने में हमें शर्म आती थी, किसको दोषी माने मनोज जी, दोषी हम सब ही हैं … अच्छा विषय पर आपके लेख के लिए बधाई


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