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याद आते है वो स्कूल के दिन

Posted On 15 Sep, 2010 Others में

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:cry: याद आते है वो स्कूल के दिन , ना जाते थे स्कुल दोस्तों के बिन,

कैसी थी वो दोस्ती कैसा था वो प्यार,

एक दिन की जुदाई से डरता थे जब आता था शनिवार,

चलते चलते पत्थरों पर मारते थे ठोकर,

कभी हंसकर चलते थे तो कभी चलते थे रोकर ,


27518_118642974846055_7285_n कंधे पर बैग लिए हाथों में बोतल पानी,

किसे पता था बचपन की दोस्ती को बिछुडा देगी जवानी,

याद आते है वो रंगो से भरे हाथ , क्या दिन थे जब वो करते थे लंच साथ,

छुट्टी की घंटी सुनते ही बाहर आना भाग कर ,

फिर हसंते हंस्ते दोस्तों से मिल जाना,


:lol: :lol: :lol: :lol: :lol: :lol: :lol: :lol: :lol:



काश!!!!!!!! वो दोस्त आज मिल जाते दिल में बचपन के फूल फिर से खिल जाते

काश वो दिन लौट आते.

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15 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Stitches के द्वारा
October 17, 2016

This is the pefrect post for me to find at this time

dharati rawal के द्वारा
September 30, 2013

अब बड़े हो गये तो समाज आया की.. अधूरे अहेसास और अधूरे सपनोसे टूटे हुवे क्ल्हिओने और अधुरा होम्वोर्क अछा था

pooja के द्वारा
September 16, 2010

nice poen dear really nice school k din yaad dila diya tumne to

    Manoj के द्वारा
    September 16, 2010

    thanks for the comment……..

rajkamal के द्वारा
September 15, 2010

आपने मेरे शुरू के दिनों में यहाँ पर बेबाकी से जो मेरा मार्गदर्शन किया … यह उस निवेश की पहली किस्त ! आप से यही गीला की aaj tak … बहुत कम लिखा ….

    Manoj के द्वारा
    September 16, 2010

    राजकमल जी कमोबेश सबको यही शिकायत है मुझसे की मै कम लिखता हूं पर आज से कोशिश होगी ज्यादा से ज्यादा लिखने की ताकि आप तक कुछ अच्छी चीजें भेज सकूं.

Ramesh bajpai के द्वारा
September 15, 2010

एक दिन की जुदाई से डरता थे जब आता था शनिवार, चलते चलते पत्थरों पर मारते थे ठोकर, प्रिय मनोज जी आपकी कविता पढ़ कर बचपन याद आ गया बहुत बहुत बधाई

    Manoj के द्वारा
    September 16, 2010

    क्या दिन थे वह जब दिल में न आन वाले दिन का डर होता था न आज का ही कोई आभास चलता था. फिर भी वह बीते दिन चाह कर भी वाप्स नही आ सकते. समय का पहिया उलटा हो ही नही सकता.

R K KHURANA के द्वारा
September 15, 2010

प्रिय मनोज जी, बचपन की याद को ताज़ा करती सुंदर कविता खुराना

    Manoj के द्वारा
    September 16, 2010

    नमस्कार खुराना जी, काफी दिनों बाद आपके किसी कमेंट को अपने ब्लॉग पर देख खुशी हुई. बचपन होता ही ऐसा है जो मरते दम तक हमें याद रहता है. इसी याद को स6जोती हुई यह एक बेहद छोटी से कविता थी.

Piyush Pant के द्वारा
September 15, 2010

यकीनन मुझे भी याद आ गए वो स्कूल के दिन…………. अच्छा पोस्ट हार्दिक बधाई………. http://piyushpantg.jagranjunction.com

    Manoj के द्वारा
    September 16, 2010

    धन्यवाद

    amrendra के द्वारा
    September 21, 2010

    ि्जरपिातकस


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