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क्या मेरी मौत भी ऐसे ही होगी? (यह आप सब पर भी लागू हो सकता है)

पोस्टेड ओन: 29 Jun, 2010 जनरल डब्बा में


काफी दिनों से ब्लॉग लिखने का अवसर नहीं मिला और आज मिला तो विषय नहीं सूझ रहा था. काफी विचार किया तभी मन में एक बात दौड़ी कि आजकल लोगों की मौतें काफी हो रही है यानी प्राकृतिक आपदाओं, नक्सली हमले और आंतकवादियों के द्वारा तो कहीं रोड दुर्घटना और प्रेम-प्रसंग के चलते भी मौतें हो रही हैं. सोचा क्यूं न अपनी मौत के बारे में भी सोच लूं. आखिर बुराई क्या है अपने आने वाले कल के बारे में प्लानिंग कर लेता हूं. क्योंकि मैं सोचूं या न सोचूं मरना तो मुझे है ही.

obituary cause of deathआज कल वैसे तो कई तरीकों से लोगों की जान जा रही है लेकिन हम भारत में रहते हैं इसीलिए कुछ भारतीयों जैसा ही सोचेंगे न. हर किसी की जिंदगी में ऐसे कई पल आते है जब उसे अपनी मौत सामने खड़ी नजर आती है मसलन जैसे गर्लफ्रैंड के घर पर अकेले उसका भाई पकड़ ले, स्कूल में नकल करते समय, चलती बस से कूदते समय, या चलती ट्रेन में चढते समय कई बार ख्याल आता है कि अगर एक पल की देरी हो जाती तो आज का दिन न देख पाते.

मेरी जिंदगी में भी ऐसे कई पल आए जब लगा कि मैं तो गया. पर हर बार शायद भगवान को मेरी जरुरत नहीं थी. एक बार बारिश में ऑटो पलट गई तब का मंजर याद करते हुए सोचता हूं कि कैसे आज यह ब्लॉग लिख रहा हूं, कई बार दिल्ली की भीड़ भरी बस में लटकते समय मन में सिर्फ एक ही बात आती है कि यार अगर हाथ छूटा तो जान निकल जाएगी, और भी ऐसे कई मौके आए जब लगा कि मौत करीब है.

अब जब इन सब से बच गया तो सोच रहा हूं कि मेरी मौत होगी कैसे? काफी विचार-मंथन किया और फिर दिमाग में कई रास्ते आए जिनसे शायद मेरी मौत हो सकती है:

Angel_Of_Death_by_aaillustrations1.  आंतकी हमले में हो सकती है मेरी मौत: हो सकता है अगली बार जब दिल्ली में कोई आतंकी हमला हो तो मरने वालों में मेरा नाम भी हो और यह तो सबसे आम होगा.

2.  नक्सली मार दें : हो सकता है अगली बार  जब मैं गांव जाऊं(अगर कभी जाना हुआ तो) तो बिहार के रास्ते में नक्सली रेल की पटरी उड़ा दें और हादसे में मेरी मौत हो जाए.

3.  मिलावट का खाना खाने की वजह से : आजकल बाहर का खाना कुछ ज्यादा ही खा रहे हैं और इंडिया टीवी की भविष्यवाणी या एक्सक्लूसिव समाचार अगर सही हुए तो भी ..

4. सड़क दुर्घटना में : भागती सड़कें और करोड़ों की गाडियों के बीच अगर कोई मरता है तो उसकी लाश कहां चली जाती है पता भी नहीं चलता और दिल्ली में तो सड़क हादसे होते ही रहते हैं ऐसे में यह भी एक संभावित कारण हो सकता है.

5. प्यार के चक्कर में ऑनर हत्या : हालांकि मैं ऐसा इसलिए सोच रहा हूं क्योंकि आजकल ऑनर किलिंग का दौर चल रहा है और दिल तो बच्चा है जी, कब किस पर आ जाए क्या कहना?

Five-Finger-Death-main हर आम और मध्यम वर्ग की सोच

खैर यह सब तो था कि मेरी मौत होगी कैसे लेकिन मैं ऐसा सोच क्यूं रहा हूं. यह बात मैं नहीं सभी आम आदमी सोचते हैं. क्यूंकि जिस तरह से आज कल दिन और हालात बदल रहे हैं आम जनता क्या करे. समय आएगा जब हो सकता है दिल्ली में मैट्रो और महंगाई की वजह से काफी मौतें होंगी.

एक आम आदमी तो हर दिन मरता है ऐसे में अगर उसे मौत एक ही दिन जाए तो इससे बेहतर क्या होगा. लोग कहते हैं चार दिन की चांदनी फिर पुरानी रात मगर अब तो आम आदमी के जीवन में चांदनी आती ही नहीं.

महंगाई के इस दौर में हो सकता है दाल-सब्जी खरीदने के लिए भी बैंक से लोन मिले, और फिर कर्ज के बोझ से आम आदमी आत्महत्या करेगा और मैं भी आम जनता में आता हूं तो

लिखते समय हम कुछ भी लिख सकते हैं लेकिन सोचते समय तो हर हद पार करने की ताकत होती है. और यकीन मानिए यह सब सोचते समय मुझे बिलकुल भी घबराहट नहीं हुई क्योंकि मुझे मालूम है कि मैं इतना अच्छा भी नहीं कि भगवान को मेरी जरुरत हो. हा….. हा…. हा

लेकिन अभी तो लगता है कि कहीं मेरी मौत ब्लॉगस्टार ना बन पाने की वजह से ही ना हो जाए.

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30 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

jayram viplav के द्वारा
July 26, 2010

अपने इस पोस्ट की चर्चा जनोक्ति.कॉम के स्तम्भ \"ब्लॉग-हलचल\" में जरुर देखें !अपने इस पोस्ट की चर्चा अपने इस पोस्ट की चर्चा जनोक्ति.कॉम के स्तम्भ \"ब्लॉग-हलचल\" में जरुर देखें !जनोक्ति.कॉम के स्तम्भ \"ब्लॉग-हलचल\" में जरुर देखें !

subodh kant misra के द्वारा
July 11, 2010

यथार्थवादी एवं मनन करने योग्य अति उत्तम लेख!

aditi kailash के द्वारा
July 8, 2010

एक अच्छे विषय पर एक अच्छा लेख…
घर से दूर होने होने और घर का मोह ना छोड़ पाने के कारण अक्सर ही मैं बसों और ट्रेनों में सफ़र करती हूँ और बढ़ती दुर्घटना और लापरवाही को देखकर, कई बार निकलते समय मन में ये विचार भी आ जाते हैं कि कहीं ये मेरा आखिरी सफ़र तो नहीं होगा… हम कुछ समय के लिए मुंबई में भी थे और वहां उन्ही दिनों एक साथ कई जगह बम विस्फोट हुए थे…. जितने भी महीने मुंबई में रहे, हर दिन यहीं सोचकर अच्छी तरह एन्जॉय करते थे कि क्या पता कल हो ना हो….

razia mirza के द्वारा
July 6, 2010

मनोजजी । आपके दिये हुए लिंक पर जाकर मैंने पाया कि मैंने वहाँ पहोंच पाने में देर करदी है। शुक्रिया कि आपकी वजह से पहुंच गई। और जाकर कमेन्ट भी दिया।
आपकी पोस्ट हमें सोचने पर मजबूर कर देती है कि ”क्या मेरी मौत भी ऐसे ही होगी?
सटिक लेखन के लिये धन्यवाद।

    manoj के द्वारा
    July 6, 2010

    रजिया जी, आपने मेरी लेखनी सराहा इसके लिए धन्यवाद. यह ब्लोग मात्र मेरी कल्पना थी मगर इसका कही न कही सबंध आम जनता से भी था इसलिए मैने इसको पोस्ट किया. साथ ही रेप वाले बलोग को मैं चाहता था ज्यादा से ज्यादा लोग पढे कुछ न सही तो आप जैसे लोग जो हर विषय की गंभारता और लेखनी को पूजते है जरुर पढें,

mihirraj2000 के द्वारा
July 1, 2010

निसंदेह मुद्दा काफी गंभीर है, मैंने इसे व्यंग के तौर पर नहीं लिया है क्युकी व्यंग सा कुछ भी नहीं है इस में. यह एक उत्कृष्ट रचना है जी भारत की गंभीर हालत को बयां कर रही है. सच मानिये इन में से कुछ चीजो पर मैं भी लिखने वाला था पर आपकी शुरुआत लाजबाब है. काफी अच्छा लगा पढ़ कर.

    Manoj के द्वारा
    July 1, 2010

    धन्यवाद मीहिर जी आप्के कमेंट के लिए लेकिन ,,,यह बात सच है कि हममे से सब कभी न क्भी अपनी मौत के बारें में सोचते है और ब्लोग होता ही सोच को उजागर करने के लिए है.

kmmishra के द्वारा
July 1, 2010

आज करे से काल कर
काल करे से परसों
पल में परलय न होगी मनोज बाबू
अभी तो जीना है बरसों ।

    Manoj के द्वारा
    July 1, 2010

    मिश्रा जी आपके कमेंट के लिए धन्यवाद …बहुत अच्छा लगा कि आपने मेरा ब्लोग पढा और कुछ प्रतिक्रिया जाहिर की.

    sunny rajan के द्वारा
    July 1, 2010

    ऐसा जीना भी क्या जीना
    जब जीते-जी आप कि कल्पना
    मौत के दर्शन कराये.
    जीना है तो खुल के जियो
    मौत के बारे में सोच कर नहीं
    जिसे जब आना होगा तब आएगा

    Manoj के द्वारा
    July 1, 2010

    सन्नी भाई जीते जी  मौत के बारें में सोच लो ताकि जानें में आसानी हो आपको पता हो कि आप कम से कम पत तो हो न कि आप किस तरह मरना चाहते है ..वैसे आप कैसी मौत चाहते है ….

contest के द्वारा
June 30, 2010

that was really a fun read… very few ppl care to go creative on the issue of self death.
3.5/5 stars !

Shailesh Kumar Pandey के द्वारा
June 30, 2010

मनोज जी आपने उत्कृष्ट लेख लिखा है .. आपका ये लेख अकेले ही ढेरों समस्याओं पर सोचने और उनके
निराकरण ढूँढने के लिए हमें प्रेसिर करता है ………..

    Manoj के द्वारा
    July 1, 2010

    शैलैश जी आपके कमेंट केलिए धन्यवाद. आज आम इंसान हर वक्त निराशा और मृत्यु के घेरे में जी रहा है औअर ऐसे में अपनी मौत के बारे में सोचना गलत्य नही है

Nikhil के द्वारा
June 30, 2010

मनोज जी बहुत अच्छा लेख. आपने जिस तरह से इसे एक श्रंखला मैं पिरोया है वो सचमुच काबिल-ए-तारीफ है.

    Manoj के द्वारा
    July 1, 2010

    निखिल जी धन्यवाद ….. आपके कमेंट से काफी प्रोत्साहन मिला

R K KHURANA के द्वारा
June 29, 2010

प्रिय मनोज जी,
यह शारीर नश्वर है इसलिए मौत तो आनी ही है ! पर डरना क्यों ?
किसी ने कहा है –
जाती हुई डोली को न आवाज लगा, इस गाँव में सब आये है जाने के लिए !
सुंदर रचना ! मेरी बधाई !
राम कृष्ण खुराना

    Manoj के द्वारा
    July 1, 2010

    लेकिन खुराना जी, शरीर नश्वर है तो चिंता किस बात की मौत के बारे में पहले ही सोच लो ..क्या आपके जीवन में ऐसा कभी नही हुआ कि आपको अपनी मौत का आभास हुआ हो.

sumityadav के द्वारा
June 29, 2010

अच्छा लिखा आपने मनोज जी।
लेकिन कहते हैं ना कि मौत से भी बुरा होता है मौत का डर। जिंदगी में मौत कब आ जाए पता नहीं
इसलिए अपना तो एक ही फंडा है मस्त रहो मस्ती में। हां, लेकिन ब्लागस्टार न बनने की वजह से
तो आपकी मौत नहीं होने वाली क्योंकि क्या पता ब्लागस्टार के अगले संस्करण में आपका ही चांस 
हो क्योंकि उम्मीद पर तो दुनिया कायम है।

    मनोज के द्वारा
    July 6, 2010

    सही कहा सुमित जी ….मौत से भी बुरा होता है मौत का डर लेकिन इसका भी अपना ही एक रोमांच  होता है एक नशा होता है मरते मरते बच जाने पर जो मजा मिलता है पूछों न

piyush के द्वारा
June 29, 2010

मनोज जी मौत को जब आना होगा तब आएगी. अभी तो आप के हसने खेलने के दिन है. मौज़ मस्ती कीजिए……

    Manoj के द्वारा
    July 2, 2010

    हम तो हस खेल रहे ही है लेकिन्म फिर भी थोडा प्रयोगात्मक सोचना पडता है ….. आप कैसी मौत के बारें में सोचते है.

allrounder के द्वारा
June 29, 2010

भाई मनोज जी, सादर नमस्कार, मैं आपके सुंदर लेख के लिए आपको बधाई देना चाहता हूँ ! साथ ही आपका आभार व्यक्त करना चाहता हूँ, इस बात के लिए की जब मैंने JAGRANJUNCTION पर लिखना शुरू किया, तो मेरी तीसरी रचना सानिया मिर्ज़ा की शादी पर पहली प्रतिक्रिया आई, शायद आप अंदाजा नहीं लगा सकते की उस प्रतिक्रिया ने मेरे अन्दर कितना उत्साह, उर्जा और विश्वास भर दिया की आज मैं BLOG STAR CONTEST के अंतिम १० मैं शामिल हूँ ! आपको शायद नहीं मालूम वो पहली प्रेरणास्पद प्रतिक्रिया आप ही की थी, उसके बाद आपने मेरे लेखों पर प्रतिक्रियाएं देना बंद कर दिया! मगर आपकी उस पहली प्रतिक्रिया मैं जिन्दगी भर नहीं भूल सकता !
आपकी वेह बहुमूल्य प्रतिक्रिया स्मरण हेतु आपको प्रेषित कर रहा हूँ !
आपका भाई
ALLROUNDER
“क्या बात कही आपने . सच में यदि सानिया युसुफ या इरफान के साथ निकाह करती तो ज्यादा खुशी होती, लेकिन शायद इसे ही दिल की मजबुरी कहते है जो पाकिस्तान में उनका दिल लग गया, खेर अभी भी कुछ भी हो सकता है , भुलिए नही कि पहले भी सानिया एक बार सगाई तोड चुकी है और इतिहास खुद को दोहरा सकता हैं.”

    Manoj के द्वारा
    June 29, 2010

    क्या सचिन जी. ऐसी बात नही है आजकल आपके ब्लोग पर इतने कमेंट आते है कि हमें डर लगता है कही आप हमारे कमेंत पढे या ना ..लेकिन आपने याद दिलाया उसका धन्यवाद ..आगे से चाहे कुछ भी हो आपके ब्लोग पर कमेंट देना नही भूलेंगे. और प्रोत्साहने के लिए धन्यवाद …आपने तो याद कर लिया लेकिन अभी भी बहुत से लोग है जिनको हम कमेंत देते रहे लेकिन हमारे ब्लोग पर कमेंट देने में वह कंजूसी दिखा रह है.

    allrounder के द्वारा
    June 29, 2010

    मनोज जी, आप को मैं कभी नहीं भूल सकता, आप कमेन्ट दें या न दें, मगर आपके पहले कमेन्ट मेरी आत्मा मैं छप गए हैं ! आज मैं इस मंच पर जो कुछ भी थोडा सम्मान हासिल कर पा रहा हूँ, उसे मैं आपको समर्पित करता हूँ !
    आपका भाई
    सचिन देव

    Manoj के द्वारा
    July 1, 2010

    सचिन जी , चाहे कुछ भी हो लेकिन आप लिखते ही इतना सुदर है कि कमेंट खुद ही निकल जाते है हम ही मात्र कोशिश करते है लेकिन कभी होता  नही व्यग्य

rita singh sarjana के द्वारा
June 29, 2010

मनोज जी , यह क्या ? जिंदगी बड़ी मुश्किल से हासिल होती हैं और आप है कि मौत की डर से ग्रसित हैं .पिछला कल बीत चूका ,आने वाला कल हमने नहीं देखा ,वर्तमान को ख़ुशी -ख़ुशी इस जिंदगी को जीकर हो सके तो किसी जरुरत मंद की मदद करना मेरे ख्याल से उचित है .अत :-अपनी मौत के डरावने ख्याल दिल से निकाल दे और एक अच्छी भावनावों के साथ सुन्दर ब्लॉग का निर्माण करे आने वाले नए ब्लॉग की प्रतीक्षा में…..

    Manoj के द्वारा
    July 1, 2010

    रीता जी, यह ब्लोग डरावना नही बल्कि  मौत की सच्चाई और आम जनता के बारे में है जो हर दिन मर मर के जीती है भगवान ने शायद आम जनता को बनाया ही प्रतिदिन मरने के लिए है …….. आपके कमेंट के लिए धन्यवाद बहुत अच्छा लगा आपका पहला कमेंट पढकर

ASHISH RAJVANSHI के द्वारा
June 29, 2010

मनोज भाई , नमस्कार |
हमारी दुआ है की इनमे से कोई भी मौत आपको क्या किसी को भी नसीब न हो |
इतना मत सोचिये अपनी मौत के बारे , हमे और इस मंच को अभी आपकी अनिवार्यता है |
व्यंग के माध्यम से अच्छा प्रयास है |
दीर्घायु की शुभकामनाएं |
धन्यवाद |

    Manoj के द्वारा
    July 1, 2010

    आशीष जी कमेंट के लिए धन्यवाद




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