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लव, सेक्स, धोखा और भारतीय समाज : एक नजरिया

Posted On: 10 May, 2010 Others में

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समाज में आजकल जो मुद्दा सबसे ज्यादा गर्म है वह है लव, सेक्स और उसके बाद धोखा. संस्कृति के नाम पर प्यार को बदनाम करने का क्रम जारी है. कुछ समाजशास्त्री प्यार, शारीरिक सबंध आदि को गलत मानते हैं तो कुछ इसे सही. इस हो-हल्ले में शायद कुछ अनदेखा रह गया. काफी सोचा और फिर ठाना कि मैं भी इस विषय में अपनी राय रखूंगा, हो सकता है कोई नया नजरिया मिले मुझे या मेरे द्वारा किसी और को.

भारत में प्यार(यानी आशिकी) के मायने

Radha Krishnaभारत कृष्ण की जन्मभूमि है, वही कृष्ण जिनकी कई हजार गोपियां थीं. राधा को उनकी प्रेमिका का दर्जा प्राप्त था. जी हां, आजकल की भाषा में आप राधा को कृष्ण की गर्लफ्रेंड कह सकते हैं. लेकिन समाज का भेदभाव देखिए कृष्ण के इस प्यार को(जो अगर सही से देखें तो गलत था) उसे भी कृष्ण की रासलीला मान उसका मजा लेता है लेकिन उसी रासलीला को देखने के बाद जब पार्क में किसी प्रेमी-युगल को देखता है तो उसे गाली देता है. खैर, श्रीकृष्ण की बात सिर्फ इसलिए कर रहा हूं ताकि एक उदाहरण दे सकूं कि भारतीय समाज में प्रेम कितना पुराना है और संस्कार और संस्कृतियों को ठेंगा दिखा कर आप प्रगतिशील नहीं कहलाएंगे . वरना यह तो वही बात हुई न कि कृष्ण करें तो रासलीला हम करे तो करेक्टर ढीला. आखिर जब हमारा समाज कृष्ण जी की प्रेमलीला को पवित्र मानता है तो क्या उसको सभी को समान दृष्टि से नहीं देखना चाहिए.

फिर यहां चन्द्रगुप्त, अर्जुन, पृथ्वीराज चौहान आदि कई प्रेमी भी हुए कुछ सफल तो कुछ असफल. कइयों के बारे में तो खुद हमारे बुजुर्ग कहानियां सुनाते थे. लेकिन मजाल कि वह सुन सकें कि हमें भी किसी से प्रेम हो गया है. चलिए यह बात तो हुई इतिहास की जरा वर्तमान को देख लीजिए. प्रेम करना जुर्म है, और इसकी सज़ा मौत भी हो सकती है – यह मैं नही समाज कहता है. आज का समाज जो पाश्चात्य को तो अपना रहा है लेकिन उसकी अन्य चीजें अपनाने में पता नही क्यों असहजता महसूस कर रहा है.

गलती किसकी – युवाओं की या हमारी संस्कृति की

एक बार और गंभीरता से सोचना पड़ा और पाया कि मुझे युवा होने के कारण युवा वर्ग के साथ पक्षपात नहीं करना चाहिए. गलती कहीं न कहीं हमारी भी है यानी युवा वर्ग की भी रही. समाज में प्रेम का बड़ा अलग स्थान है यानी अगर आप छुप-छुप कर जो करना चाहो कर लो, अगर उसकी भनक किसी को लगी तो गए काम से समझो और हां कभी-कभी जान से भी.

relationsआजकल प्यार के मायने बदल गए हैं. युवा वर्ग ने प्यार को मात्र दैहिक संतुष्टि का जरिया मान लिया है. जिसे चाहो उसे प्रेमी या प्रेमिका बना लो, और फिर अपना काम बनता है तो भाड़ में जाए जनता. कुछ लोगों की वजह से सब लोगों की नजरों में प्यार की नई परिभाषा आ गई है. अब प्यार को धोखे का पर्याय माना जाने लगा है. गलती सिर्फ लड़कों की नहीं है, कई बार लड़कियां भी लड़कों को पीछे छोड देती हैं. प्यार को प्यार नही मात्र बेढंगा दिखावा बना दिया गया है, हाथ में मोबाइल लो यह मत देखो कि आसपास कोई बड़ा है या नहीं बस शुरु हो जाओ अपनी दुनिया की बातें करो. पार्क आदि सामाजिक स्थलों को अपने दैहिक संतुष्टि करने के लिए इस्तेमाल करो और संस्कृति को तो मानों बिस्तर के नीचे रख कर सो जाओ. यह कुछ ऐसी वजहें हैं जिनकी वजह से बड़े प्यार के नाम से चिढ़ने लगे हैं. उन्हें लगता है कि हर लड़का/ लड़की एक जैसे होते हैं सिर्फ मतलबी और सेक्स के लिए प्यार करना जानते हैं.

बनना तो है पश्चिमी देशों की तरह लेकिन करना वैसा नहीं

सबसे बड़ी परेशानी की वजह, हम सब ने पश्चिमी देशों जैसा बनने की सोच तो ली लेकिन उनकी कुछ आदतों से परहेज ही रखते हैं. हम क्यों भूल जाते हैं कि “गेहूं के साथ घुन भी पिस जाता है”. मोबाइल और इंटरनेट ने बाकी की दूरियां छुमंतर कर दी हैं.

सही कौन, कौन गलत- पता नहीं

यह तो एक आम परेशानी है कि कौन सच्चा प्रेम करता है और कौन मात्र दैहिक संतुष्टि के लिए. कई बार  तो इस पेशमपेश में सही बंदे भी डूब जाते हैं.

लव में सेक्स – सही या गलत ?

यह एक ऐसा विषय है जिस पर अगर आप किसी भी अभिभावक से पूछ लें तो उनका जवाब होगा “नहीं, बिलकुल नहीं यह नाजायज है”. लेकिन अगर किसी युवा से पूछें तो यकीनन नब्बे प्रतिशत कहेंगे “हां, यह सही है”. पर कहते हैं न जब अपने पर आती है तो सारे समझ धरी की धरी रह जाती है.

2man-1_1272808215_mअब जो मैं कहने जा रहा हूं वह एक ऐसा सत्य है जिसे शायद ही कोई मानें मगर कहते हैं ना सच कड़वा ही होता है. अगर आप इन्हीं अभिभावकों से पूछ लें कि क्या यह अपने युवाकाल में कभी किसी के प्रति आकर्षित नहीं हुए तो इनका जवाब सुन हैरानी होगी. यह खुद तो आम खाने से नहीं शर्माते मगर इनके बच्चें या कोई दूसरा युवा यह करे तो भईया यह उसकी जान तक ले सकते हैं. मगर यहां भी ताली एक हाथ से नहीं बजती. युवाओं ने प्यार में सेक्स को न सिर्फ सही माना बल्कि सेक्स को ही प्यार माना है. इनके लिए सेक्स के बिना प्यार का मतलब ही नहीं. इस एक शब्द ने प्यार को गुनाह बना दिया है.

लेकिन कई बार यह सही भी है जरा सोचिए अगर आप किसी को प्यार करते हैं, दिन-रात उसी के बारे में सोचते हैं, उससे अपनी सभी बातें शेयर करते हैं तो क्या आखिर उसके साथ अगर किसी हालात में शारीरिक संबध बन जाते हैं (और अधिकतर संभावना होती है कि बन ही जाते हैं) तो इसमें बुराई ही क्या है?

मगर हां, यहां फिर असमंजस की स्थिति पैदा होती है. क्या यही सब अगर हमारे परिवार में किसी के साथ हो तो हम बर्दाश्त करेंगे ? शायद नहीं. लेकिन इसका जवाब क्या होगा यह सिर्फ परिस्थितियां ही दे सकती हैं.

समाज की समझ – सत्य गया भाड़ में, प्यार मानें गलत बात

जी हां, सही समझे आप समाज कहता है कि प्यार गलत है, प्यार सिर्फ सेक्स है, भूख है, बस , अगर किया तो अंजाम बुरा होगा. समाज की नजर में अगर कोई लड़का किसी लड़की से हंस कर बात करे तो वह लड़का गलत है और अगर लड़की करें तो भइया लड़की बदचलन.

आजकल कुछ ऐसी घटनांए हो रही है भारत में जिससे यह कह पाना मिश्किल है कि यह कृष्ण-भूमि है. अशिक्षित तो दूर पढे लिखे भी प्यार को समाज में बुरी नजर से देखते हैं. हरियाणा, राजस्थान और उ.प्र. का तो अगर अखबार उठा लो तो हर दूसरे दिन आपको प्यार के मारे और उनके दुश्मनों की कहानी मिलेगी.

यही वह कारण है जिसकी वजह से हर कोई प्यार से दूर भागता है. यह एक ऐसा विषय है जिसे सोचते तो सभी हैं लेकिन बात कोई नहीं करता. कई बार यह मानसिक कुंठा बनती है तो कभी कभी यह एक दबी भावना बन जाती  है.

उपाय: सरकार काफी समय से सेक्स-शिक्षा को अनिवार्य करने की सोच रही है लेकिन कागजों के अलावा कहीं और इसे नहीं इस्तेमाल किया गया. जिस चीज को युवा वर्ग प्यार का नाम देती है वह वास्तव में दैहिक आकर्षण है जिसे कहते हैं अगर सही समय पर नही पहचाना गया तो हवा कहीं भी बहा ले जाती है.

और अगर प्यार में शादी से पहले सेक्स की आवश्यकता होती है तो आज के युग में कई उपाय हैं जिनके माध्यम से सुरक्षित संबंध बनाए जा सकते हैं. जरुरत है तो जागरुकता की. युवा वर्ग को प्यार जैसे मसलों को अभिभावकों से छिपाना नहीं बल्कि ऐसे मसलों में उनकी राय भी लेनी चाहिए.

प्यार भावनाओं से होता है, एक-दूसरे के मन को समझने से होता है न कि तन के आकर्षण से. अगर युवा वर्ग इस बात को समझ लें तो हालात बदल सकते हैं.

मेरी सोच: मेरी मानें प्यार गलत नहीं है और हां, अगर सबंधों के दरमियान कभी ऐसा हो कि शारीरिक संबंध बन जाए तो पहले सावधानी बरतें और दूसरे, अपने पार्टनर के साथ धोखा कभी न करें. कहीं ऐसा न हो कि आपके लव और धोखे की वजह से किसी की जिन्दगी और इज्जत खतरे में पड़ जाए. ऐसा कई बार होता है जब प्यार की सीमा टूट जाती है मगर उसके बाद उस लड़की के लिए काफी चीजें खत्म हो जाती हैं और ऐसे में अगर धोखा मिले तो शायद ही कोई सह पाए.

तो सीधी सी बात है अगर लव में सेक्स जरुरी हो तो उसे धोखा मत दो.

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11 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

rahul के द्वारा
February 16, 2013

mere sath to na jane kya ho raha hai… meri hone wali patni ne mujhe bataya ki uska pahle bhi kisi aur ke sath sex ho chuka hai.. wo mujhse bahut pyaar karti hai aur main bhi usse bahut pyar karta hu.. main kya karu samjh me nahi aa raha hai..main apni patni ko kisi aur ke sath kaise soch sakta hu.. kya aapme se koi sahi sujhav de sakta hai..

ROHIT CHOUDHARY के द्वारा
June 17, 2010

aap ko samjh na chahiye ki jitni bhi “lave marrige” unme se 5% hi sccusses hoti hai kiynoki lave marrige ka base keval sex hota kiynoki koi aadmi apni wife main ek suseel woman ki kamna karta hai jo hamesa kapro ain dhakee or ijjat se rahe lekin ” love marrige ” wife aapki har baat manane ko tayaar nahi hoti kinoyki uasko vahi aajadi chahiye hoti jo saadi se pahle thi lekin saadi ke baad insaan ka apna najriya badl leta hai

kamal .kashyap के द्वारा
May 31, 2010

मैं यह सभी से एक बात पूछता हु प्यार को हम किस नज़र से देखते है प्यार मैं सेक्स की बात पर रोजाना कोई न कोई समजदार समाज का टेकेदार हो हल्ला करते है भाई प्यार मैं सेक्स कोई बुराई नहीं है प्यार होगा तो सेक्स होगा और सेक्स होने पर प्यार और जयादा मजबूत होगा. और जब दो लोगो को परेशानी नहीं है तो हम क्यों हाय हाय करते है रही बात संस्कृति की तो आज का युवा जिस मजबूती से अपनी संस्कृति को पकडे हुए है किसी और देश का युवा वेसा कर भी नहीं सकता …. आज का युवा अपने धार्मिक आयोजनों को भी एक अलग तरीके से मनाता है जिसे बड़े बुजुर्ग सब साथ एन्जॉय करते है.. बॉम्बे का डंडिया,,, मटकी तोडना ये सब आज युवाओ की ही दें है जिसे उन्होंने एक नए अंदाज मैं बदल दिया है.. आज का युवा आज हर त्यौहार को एन्जॉय करता है तो लोगो की ये सोच की युवा अपनी संस्कृति को भूल चुका है गलत है… और हम युवा बदलने वाले नहीं है

    Rahul Pandey के द्वारा
    October 11, 2010

    pyar me sex hota hai to ye thik us samay ke liye hoga jab ap apne pyar se hi sadi kare nahi to ye galat hai agar tumhari Biwi ka sexual realation kisi aur ke sath tha aur shadi tumse ho raha hai to tum kya feel karoge aur yahi bat ladko ke upper bhi lagu hoti hai agar kisi ladki ko ye pata chale ki uske pati ka relation pahle bhi kisi ke sath tha to use kaisa lagaega mai tum laga ka to nahi janta par mujhe y bardash nahi hoga

kmmishra के द्वारा
May 25, 2010

राधा कृष्ण के सम्बन्धों का आध्यात्मिक महत्व है । उसे इस नजरिये से नहीं देखना चाहिये । मानव जाति की प्राचीनतम समस्या को आपने संतुलित तरीके से उठाया है । इस विषय पर अपना अनुभव कोरा ही है । दिल में उम्मीदे बहुत थीं जो परवान न चढ़ सकीं । खैर । बढ़िया और संतुलित लेख के लिये आभार ।

PRIYA के द्वारा
May 14, 2010

aaj kal ke ladko ko sirf sex se matlab hota hai ..pahele sab kahte the aur sahi kahte hai ALL MENS ARE DOG……jaha dekhi ladki vahi pani tapakene lagta hai…or haa KRISHNA JI Ke PYAR ko lagat batana sahi nahi hai ..YAH APKI CHOTIU MANSIKATA KAA PARINAAM HAI… BHAGWAN KO GALTA KAH apne aap ko hit karna band kar

    Rahul Pandey के द्वारा
    October 10, 2010

    @prya aap sahi kah rahe ham aise log hi hai ham logo ne hi samaj ko bigada hai lakin ab ye itna bigad gaya hai ki ab dar lagne laga hai ab vishwas ban hi nahi paa raha hai na wo mujh par vishawas kar paa rahi hai aur na mai us par aur bhagwan ka relation to fair relation that lakin aaj samaj me do no traf se galat ho raha ladko ke trf se aur ladkiyo k traf se bhi galat ho rahahai jo ham sabhi ke liye galat ho rah her kadke aur ladki ko sirf ek sath hi relation bana chahiye aur agar samaj me kutte hai to usi samaj me kutiya be aa rahi hai

abhishek yadav के द्वारा
May 14, 2010

Really a very common topic nowa days. But its right that Only SEX is now LOV there is nothing LOVE in live ITs all about SEX SEX and MONEY….NICE CONCEPT.

Rahul Pandey के द्वारा
May 13, 2010

Aap sahi kah rahe ho ki Aaj Pyar ka matlab Love Sex Aur Dhokha hi hai aur Sex to itna jada ki ab lagta hi nahi ki hamari shadi kisi aisi ladki/ladka se hogi jisane sex na kiya ho sachchi mujhe aaj ka samaj dekh kar dar lagta hai mai hamesha ek aisi ladki khojta hoon jise pyar ka matlab pata ho lakin start mai to sab sahi milta hai lakin kuch samay ke bad pata chalta hai ki uska relation dusharo ke sath bhi hai phir kaise mai uasase shadi kar sakta hoon sachchi is bhayavah tasvir ko dekhar dar lagta hai in last I want to say that “Still Searching True Love “………..

shashank के द्वारा
May 12, 2010

आप ने मेरे दिल की बात utha दी है , आप कुछ और भी करना चाहता हो तो मुझे ९०४४५८६०७९ पे कॉल करे …… आप जेसे लोग ही दुनिया बदल सकते हैं … zarurat है mil kar saath chalne की

zeal के द्वारा
May 10, 2010

Youngsters are confusing physical attraction as love.


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