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सचिन ये तूने क्या कर दिया ?

Posted On: 22 Feb, 2010 sports mail में

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“क्रिकेट में नाम नहीं खिलाडी खेलता है.” जब से इस खेल को समझना और देखना शुरु किया यही सुना था, मगर कल जयपुर के सवाई मानसिंह स्टेडियम में यह बात गलत दिखी. कल का मैच बेहद रोमांचक था. एक आसान सी लगने वाली जीत को कैसे मुश्किल बनाते हैं यह जानने के लिए मैच की हाईलाइट देखना मत भूलिएगा. पहले तो बात करते हैं इस पोस्ट की मुख्य वजह से. कल भारत-द. अफ्रीका के बीच वनडे मैच चल रहा था. भारत ने यंगिस्तान के सैनिक रैना, कार्तिक और कोहली की शानदार पारियों की बदौलत अपने निर्धारित 50 ओवरों में 298 रन बनाए(बाकी के खिलाड़ी शायद पवेलियन जाने की जल्दी में थे).

हीरो या ...............

हीरो या ...............


बारी आयी द. अफ्रीका की. पहले तो भारतीय गेंदबाजो ने ऐसा दबदबा बनाया कि एक समय पर स्कोर बोर्ड 7/180 पर था. पर इसके बाद जो हुआ उसने भारत की पुरानी आदत की याद दिला दी. विपक्षी कप्तान कैलिस ने 89 रनों की पारी खेल साफ कर दिया कि वह जल्दी हार मानने वाले नहीं और सांस अटकाने का असली काम किया वायेन पार्नेल व डेल स्टेन ने. एक रन से जैसे तैसे जीत मिली. खैर अंत भला तो सब भला. मगर मेरे दिमाग में एक चीज घर कर गई, आखिर यह एक रन बचाया किसने ?

सबका जवाब था जी सचिन ने. सचिन ने जिस तरह डाइव लगा कर एक रन बचाया वह काबिले तारीफ था. मगर साथ ही मेरी नजर में विवादास्पद भी. टी.वी. रिपले से साफ लग रहा था कि सचिन से चूक हो गई है और निश्चित ही इसे बॉउण्ड्री करार दी जाएगी मगर थर्ड अंपायर को न जाने क्या संदेह था जो उन्होंने बेनेफिट ऑफ डाउट दे दिया. शायद इसके पीछे वजह थी डाइव लगाने वाले शख्स का नाम सचिन था सचिन रमेश तेंदुलकर. वह शख्स जिसे भारत के क्रिकेट दीवाने भगवान से कम नहीं समझते. जिस के नाम आज बल्लेबाजी के सभी रिकोर्ड हैं.

मैं सचिन के खिलाफ टिप्पणी नही कर रहा हूं बल्कि अपनी आवाज , अपने ब्लॉग से समाज की एक आदत को इंगित कर रहा हूं जो नाम बडा होने पर नियमों को बदलने में गुरेज नही करता. कल एक गलत फैसले की वजह से द. अफ्रीका मैच हार गया. एक रन के मायने शायद सचिन से ज्यादा कोई नही जानता. वनडे कैरियर में 4 बार शतक से महज 1 रन चूक जाने वाले सचिन को शायद यह विधाता का पुरस्कार हो मगर एक खेलप्रेमी की नजर में तो इसे पक्षपात कहा जाएगा.
आपको क्या लगता है ?

क्या वाकई क्रिकेट में नाम नहीं खिलाड़ी खेलता है?
या…………………..
सचिन को कल के मैच का हीरो कहा जाए या मुजरिम ?

आपके क्या विचार है जाहिर कीजिए

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10 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Nishant के द्वारा
January 18, 2011

कभी कभी तरस आता है ऐसी विचार धरा वाले लोगो पर, जो जिंदगी में खुद तो कुछ कर नहीं सके और जो लोग करते है उन में भी कमी निकालते रहते है, पर कोई बात नहीं, सचिन को आप जैसे छोटे लोगो की छोटी सोच से कोई फर्क नहीं पड़ता..

Ashish choudhary के द्वारा
February 23, 2010

bilkul sahi kaha apne ,samaj bade logo ki galti chupane ke koshish karta rahta hai.

vijay के द्वारा
February 23, 2010

apki baat galat hai,,,sachin par sawal utane se pahele apko 100 bar sochna chahi tha …..

vijay के द्वारा
February 23, 2010

आप बिलकुल गलत हो श्रीमान आपको सचिन की तारीफ़ करनी चाहिए और आप उसकी वत लगा रहे हो ये आपको शोभा नहीं देता. अपनी सोच बदलिए.

    Manoj के द्वारा
    February 23, 2010

    महोदय मैंने सचिन को गलत नही कहा बल्कि समाज की पवृति को दर्शाया है और मेरे मन के कहा लिखा सोच बदलने से नजरिया नहीं बदल सकता.

skk के द्वारा
February 23, 2010

एक बात समझ मे नहि आ रही है, कि जो लाख कोशिशों के बाद टी0 वी0 अम्पायर को नही दिखी, किसि कमेन्ट्रैटर को नही दिखी , वो आप को कैसे दिख गयी ? या तो आप स्टेडियम मे , पहली लाइन मे वही बैठ होंगे जहा , सचिन फ़िल्डिन्ग कर रहे थे , य फ़िर आपके पास अलग से कोइ फ़ूटेज होगा जो दुनिया में कही नही दिखायी गयी । मुझे इसमे से कोइ बात सहि नही लग रहीहै , हां अगर सहि लग रही है तो ये कि कुछ दुखी लोग होते ही ऐसे है जिनको अपनों की तारीफ़ के बजाय दूसरों की वाह-वाही में ज्यदा सुख मिलता है।

manish singh के द्वारा
February 23, 2010

यह कोई नयी बात नहीं है हमेशा मैच यह सब चलता रहता है और नजाने कितनी ही बात सचिन के साथ भी खुद हुआ है , यह सब गेम का हिस्सा है एक और मैच मैं जब कोई बड़ा खिलाडी खेलता है तो वह अपने नाम के साथ भी खेलता है जिसे दुनिया जानती है.

    Della के द्वारा
    October 17, 2016

    Good to see real expertise on display. Your cottiibunron is most welcome.

    मनोज के द्वारा
    February 22, 2010

    आरिफ जी, कमेंट के लिए धन्यवाद..


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